केकड़ी, 10 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): एनडीपीएस मामलों की विशिष्ट न्यायाधीश व अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-1 जयमाला पानीगर ने मादक पदार्थ तस्करी के 6 साल पुराने मामले में अवैध डोडा पोस्त पाउडर की तस्करी करने के आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15(ख) व धारा 8/25 के तहत दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी को प्रत्येक धारा में 7-7 वर्ष के कठोर कारावास व 50-50 हजार रुपए (कुल 1 लाख रुपए) के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में दोषी को प्रत्येक अपराध के लिए 3-3 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को दी गई दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

क्या है मामला: गत 7 फरवरी 2020 में भिनाय थानाधिकारी धर्मपाल सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बांदनवाड़ा डाक बंगले के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग-79 पर नाकाबंदी कर रखी थी। इस दौरान भीलवाड़ा की तरफ से आ रहे एक 10 चक्का संदिग्ध ट्रक को रोककर जब चालक झिरमल सिंह (49) पुत्र गुरचरण सिंह निवासी शिकार तहसील डेरा बाबा नानक थाना कोटली सूरत माल्ही जिला गुरदासपुर पंजाब से पूछताछ की गई, तो वह घबराने लगा। उसने पुलिस को बताया कि वह पूना से दिल्ली के लिए दूध का पाउडर लेकर जा रहा है। जब पुलिस टीम ने ट्रक के तिरपाल को हटाकर गहनता से जांच की, तो मिल्क पाउडर के प्लास्टिक बैगों के नीचे छुपाकर रखा हुआ एक प्लास्टिक का कट्टा बरामद हुआ। कट्टे को खोलने पर उसमें 20 किलोग्राम अवैध अफीम डोडा पोस्त का पाउडर मिला, जिसका आरोपी के पास कोई वैध लाइसेंस या परमिट नहीं था। इस पर पुलिस ने ट्रक व दूध पाउडर के 680 बैगों को जब्त कर आरोपी चालक को मौके से गिरफ्तार कर लिया था।

अल्प मात्रा से अधिक था अवैध माल, नरमी बरतना उचित नहीं: सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान करवाए गए तथा 56 दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। बहस के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने स्वतंत्र गवाह नहीं होने व तकनीकी कमियों का हवाला देकर बरी करने की मांग की थी। वहीं अपर लोक अभियोजक (एपीपी) मोहिंदर जोशी ने प्रभावी व कठोर पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष के गवाह व दस्तावेज पेश कर अपराध को संदेह से परे साबित किया। विशिष्ट न्यायाधीश जयमाला पानीगर ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यद्यपि आरोपी से बरामद मादक पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) से कम थी, लेकिन यह अल्प मात्रा (Small Quantity) से काफी अधिक थी। अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने कहा कि केवल मुकदमा लंबा लंबित रहने के आधार पर तस्करों के प्रति नरमी का रुख अपनाना न्यायसंगत नहीं है।

