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वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अवैध मादक पदार्थ तस्करी का मामला: न्यायालय ने चालक व वाहन मालिक समेत चार दोषियों को सुनाई 10-10 साल की सख्त सजा, जुर्माना भी लगाया

केकड़ी, 04 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): विशेष न्यायालय (एनडीपीएस एक्ट मामलात) की विशिष्ट न्यायाधीश जयमाला पानीगर ने एनडीपीएस एक्ट के आठ साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए अवैध मादक पदार्थ डोडा पोस्त की तस्करी व तस्करी में प्रयुक्त वाहनों के स्वामियों व मददगार चार आरोपियों को दस-दस साल के कठोर कारावास एवं एक-एक लाख रुपए के जुर्मानें से दंडित करने के आदेश दिए है। अदम अदायगी पर चारों आरोपियों को एक-एक साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। प्रकरण के तथ्यों के अनुसार 13 नवंबर 2017 को सावर थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि पण्डेर (भीलवाड़ा) की तरफ से एक बंद बॉडी बोलेरो पिकअप में अवैध डोडा पोस्त भरकर नसीराबाद की तरफ ले जाया जा रहा है। पुलिस ने कुशायता सरहद पर नाकाबंदी कर तेज गति से आ रही संदिग्ध बोलेरो पिकअप को सरकारी वाहन आगे लगाकर रोका। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें 318 किलो 600 ग्राम (3 क्विंटल 18 किलो 600 ग्राम) अवैध अफीम डोडा पोस्त का चूरा बरामद हुआ, जिसे 12 कट्टों व बोरों में भरकर ले जाया जा रहा था।

अभियोजन पक्ष ने पेश किए 26 गवाह व 119 दस्तावेज: पुलिस ने मौके से चालक सीताराम निवासी कारंगा बड़ा थाना फतेहपुर जिला सीकर को गिरफ्तार किया था। अनुसंधान के दौरान सामने आया कि पुलिस को झांसा देने के बोलेरो पिकअप पर फर्जी नंबर प्लेट बोल्ट से कसी गई थी। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। विस्तृत अनुसंधान के बाद पुलिस ने वाहन में खलासी का कार्य कर रहे विधि से संघर्षरत बालक के खिलाफ अनुसंधान लंबित रखते हुए चालक सीताराम, वाहन स्वामी बोगेरा थाना भानीपुरा जिला चुरू निवासी रामनिवास एवं सह अभियुक्त बेरास थाना बलारा जिला सीकर निवासी केसरदेव व कुल्हरियों की ढाणी मंडावरा थाना सीकर सदर जिला सीकर निवासी सुमेर सिंह के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। अपर लोक अभियोजक मोहिन्दर जोशी ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 26 गवाहों के बयान करवाए गए तथा 119 दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक मोहिन्दर जोशी ने विविध तर्क दिए।

न्यायालय ने की सख्त टिप्पणी: सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर सीताराम, रामनिवास, केसरदेव व सुमेर सिंह को 10-10 साल के कठोर कारावास एवं एक-एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित करने के आदेश दिए है। अदम अदायगी पर आरोपियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को मूल सजा में समायोजित किया जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपी मादक पदार्थ के संबंध में अपनी बेगुनाही की उपधारणा को गलत साबित करने में पूरी तरह विफल रहे है। न्यायालय ने फैसले में लिखा कि हस्तगत प्रकरण में अभियुक्तगण से अवैध मादक पदार्थ बरामद होना प्रमाणित हुआ है। जो वाणिज्यिक मात्रा का है, जो कि अत्यंत गंभीर प्रकृति का अपराध है। ऐसे में आरोपित अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्तगण के प्रति सजा में नरमी का रुख अपनाया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है।

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