केकड़ी, 04 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): सूरजपोल गेट स्थित रामस्नेही वाटिका में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का गुरुवार को पूर्णाहुति, महाआरती व विशाल भंडारे के साथ समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से पंडित घनानंद महाराज ने सुदामा चरित्र एवं भागवत विदाई प्रसंग का रसपान कराया। कथा के मुख्य यजमान अशोक पारीक, आदित्य पारीक, गिरिराज पारीक, महेन्द्र प्रधान व सीमा शर्मा ने परिवार सहित व्यासपीठ की विशेष पूजा-अर्चना की। यजमान परिवार ने भागवत जी की विदाई की रस्म अदा की व पंडित घनानंद महाराज का आशीर्वाद लिया। इससे पूर्व कथा में रुक्मणी मंगल (श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह) का प्रसंग भी बेहद धूमधाम से मनाया गया।

सुदामा चरित्र सुन भावुक हुए श्रद्धालु: कथा व्यास पंडित घनानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण व उनके परम मित्र सुदामा के दिव्य मिलन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत का कोई स्थान नहीं होता, ईश्वर केवल सच्चे प्रेम व भक्ति के भूखे हैं। सुदामा चरित्र का जीवंत व मार्मिक वर्णन सुनकर पांडल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। कथा के विश्राम पर महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने अश्रुपूरित नेत्रों से श्रीमद्भागवत ग्रंथ को विदाई दी।

समिति के सदस्यों ने दी सराहनीय सेवाएं: सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान को सुचारू व सफल बनाने में स्थानीय आयोजन समिति के सदस्यों ने अपनी सराहनीय सेवाएं दीं। समिति के महेन्द्र पारीक, अक्षिता गौड़, श्याम विजय, कौशल पारीक, आनन्द सोमानी, तुलसीराम विजय, निरंजन मोदी व श्याम पारीक सहित कई गणमान्य नागरिकों ने व्यवस्थाएं संभालकर आयोजन को भव्य रूप दिया। समापन के अवसर पर रामस्नेही वाटिका में विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया। इसमें शहर व आस-पास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की।


