केकड़ी, 30 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): अजमेर की पोक्सो कोर्ट संख्या-एक ने 5 वर्षीय मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी कथित भाई को आजीवन कठोर कारावास व 20 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक मासूम बच्ची जो नजदीकी रिश्ते में लगने वाले भाई पर विश्वास करती थी। उसके साथ इस तरह की शारीरिक और मानसिक क्रूरता करना मानवीय संवेदनाओं की हत्या है। ऐसे अपराधी समाज में किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। यह विश्वासघात व क्रूरता की पराकाष्ठा है। उन्होंने फैसले में लिखा कि इस उम्र में बच्ची को जो असहनीय शारीरिक पीड़ा, ब्लीडिंग व गंभीर चोटें आई हैं, वे उसके कोमल शरीर व मन पर कभी न मिटने वाली छाप छोड़ देती हैं।

यह था पूरा मामला: अभियोजन पक्ष के अनुसार गत 9 जुलाई 2024 को पीड़िता के पिता ने केकड़ी शहर थाना पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 8 जुलाई की शाम को मासूम घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। तलाश करने पर वह झाड़ियों में रोती हुई मिली, जिसके बाद उसे जेएलएन हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां बच्ची ने अपने साथ हुई दरिंदगी की बात बताई। पुलिस ने मामला दर्ज कर रिश्ते में भाई लगने वाले कथित आरोपी भाई को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अनुसंधान व मेडिकल रिपोर्ट में घटना की पुष्टि होने के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष 23 गवाह व 44 दस्तावेज प्रस्तुत किए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत कुल 6 लाख रुपए की प्रतिकर राशि भी दिलाई।

कोमल मन पर कभी न मिटने वाली छाप: विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने फैसले में लिखा कि समाज में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। इस तरह के भयानक आघात की भरपाई कानून के कड़े रुख से ही संभव है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक ऐसे जघन्य कृत्यों के लिए कठोरतम सजा नहीं दी जाएगी, तब तक अपराधियों में कानून का डर पैदा नहीं होगा। ऐसी सजा अन्य अपराधियों के लिए एक कड़ा सबक बनेगी। पोक्सो जैसे कड़े कानूनों का उद्देश्य ही यही है कि मासूमों को सुरक्षा मिले और उनके परिजनों का कानून पर विश्वास बना रहे। ऐसे मामलों में कठोर सजा देना, समाज के नैतिक ताने-बाने को बचाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
संबंधित समाचार पढ़िए…

