केकड़ी, 10 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): नगर पालिका चुनाव के लिए मतदान खत्म होने के साथ ही रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर शुरू हो गया है। जनता भले ही आगामी 14 सितंबर को आने वाले चुनाव परिणाम का इंतजार कर रही हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने परिणाम से पहले ही अपनी अगली रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। क्रॉस वोटिंग और खरीद-फरोख्त की आशंकाओं के बीच भाजपा, कांग्रेस और आरएलपी ने अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया है। यानी मतदान खत्म, लेकिन सियासी हलचल बरकरार है। नगर पालिका के 40 वार्डों में कुल 99 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा है। मतदान सम्पन्न होने के साथ ही सभी प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है। अब 14 सितंबर को मतगणना के साथ यह तय होगा कि शहर की शहरी सरकार की कमान किसके हाथों में जाएगी।

एकजुटता बनाएं रखना बड़ी चुनौती: परिणाम से पहले शुरू हुई इस कवायद को सियासी गलियारों में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ या ‘बाड़ेबंदी’ के नाम से देखा जाता है। भाजपा, कांग्रेस व आरएलपी ने अपने सभी प्रत्याशियों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग अथवा खरीद-फरोख्त की किसी भी संभावना को रोकने के लिए सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है। प्रत्याशियों के आने वाले दिनों में बड़े होटलों और लक्जरी रिसॉर्ट में ठहरने की चर्चा है। हालांकि राजनीतिक दल इस कवायद को बाड़ेबंदी मानने से इनकार करते हैं। पार्टियों का कहना है कि प्रत्याशियों को ‘प्रशिक्षण कार्यशाला’ के लिए साथ रखा गया है। लेकिन चुनाव परिणाम के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव को देखते हुए इस सियासी सतर्कता के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

14 सितंबर को छंटेगा जीत-हार का धुंधलका: 14 सितंबर को परिणाम घोषित होने के साथ ही हारने वाले प्रत्याशियों की ‘मेहमाननवाजी’ खत्म हो जाएगी और उन्हें वापस घर लौटने की छूट मिल जाएगी। दूसरी ओर जीतने वाले पार्षदों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव तक सुरक्षित रखा जाएगा। अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर और उपाध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को होगा। ऐसे में परिणाम आने के बाद विजयी पार्षदों को अपने पाले में बनाए रखना राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, चुनावी माहौल में इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं।

परिणाम के बाद शुरू होगा असली खेल: 40 सदस्यीय नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय और अन्य दलों के विजयी पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ऐसे में 14 सितंबर को परिणाम सामने आने के बाद नगर पालिका की सत्ता के लिए सियासी जोड़-तोड़ का दौर और तेज होने की संभावना है। फिलहाल जनादेश ईवीएम में कैद है और प्रत्याशी रिसॉर्ट में सुरक्षित। अब देखना यह है कि 14 सितंबर को ईवीएम से निकलने वाला जनादेश किस दल के पक्ष में जाता है और 21-22 सितंबर को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कौन काबिज होता है।

