केकड़ी, 02 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य विनश्चय महाराज के सुशिष्य श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि इंसान दो प्रकार से परिचय रखता है—एक अंतरंग व दूसरा बाह्य। बाह्य परिचय को तो लोग व्यवहार रूप से समझ लेते हैं, लेकिन अंतरंग परिचय के मामले में व्यक्ति कुछ का कुछ समझ बैठते हैं। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मन्दिर में कुंदकुंद आचार्य रचित ‘रयणसार ग्रंथ‘ पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति प्रमादी होकर किसी भी कार्य को धीरे-धीरे करता है और हाथी के समान स्वभाव वाला बन जाता है, जिससे वह किसी भी क्षेत्र में तरक्की नहीं कर पाता। उन्होंने सीख दी कि कभी भी पुरानी बातों को लेकर गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए। मन के लालच के आगे इंसान की विवेक बुद्धि भी हार जाती है, जबकि दुनिया भावनाओं से नहीं बल्कि व्यवहारिकता से चलती है।

भक्तामर स्तोत्र के आलंबन से टल जाते हैं संकट: धर्मसभा में संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने मानतुंगाचार्य रचित ‘भक्तामर स्तोत्र‘ के माध्यम से प्रभु के गुणानुवाद की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि लौकिकता में शारीरिक दर्द होने पर हम दवाई का सेवन करते हैं और दर्द से निजात पाते हैं, वैसे ही जीवन में विपत्ति आ जाने पर भक्तामर स्तोत्र के आलंबन मात्र से संकट दूर हो जाते हैं और विघ्न-उपद्रव शांत होते हैं। जिस प्रकार सागर में गिर जाने पर विषधारी जंतुओं से बचना मुश्किल होता है, वैसे ही विषम परिस्थिति में मनोयोग व श्रद्धापूर्वक प्रभु का स्मरण करने से भव-भवांतर के कष्ट दूर हो जाते हैं।

माताजी संघ ने किया मेहंदवास के लिए विहार: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि इस दौरान जिनेंद्र देव के स्वर्ण कलश करने का सौभाग्य रामथला परिवार के टीकमचंद, विपिन कुमार, जितेंद्र कुमार व सानिध्य कुमार मित्तल को मिला। वहीं प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य जूनियां निवासी शांतिलाल, पारस कुमार, विनोद कुमार व राकेश कुमार मंगल ने प्राप्त किया। समाज के दिलीप जैन ने बताया कि घंटाघर स्थित आदिनाथ मंदिर में बालाचार्य निपुण नंदी महाराज ससंघ विराजमान हैं। बालाचार्य की संघस्थ कनकश्री माताजी, जयश्री माताजी व संयमश्री माताजी का अतिशय क्षेत्र मेहंदवास चातुर्मास के लिए शाम 5:00 बजे आदिनाथ मंदिर से विहार हो गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।


