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श्री नेमीनाथ मंदिर में धर्मसभा: भगवान धर्मनाथ के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया मोदक, मुनि प्रज्ञान सागर बोले— ‘धर्म सरल पर धर्मात्मा बनना कठिन’

केकड़ी, 18 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य विनश्चय महाराज के सुशिष्य श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि अनादि काल से जीव चौरासी लाख योनियों में भटकते हुए नरक, तिर्यंच व मनुष्य गति में परिभ्रमण कर रहा है, फिर भी उसे मोक्ष मार्ग नहीं मिल पा रहा है। यह संसार दुखों का सागर है, जहां कोई भी सर्व सुखी नहीं है। काल कभी भी आ सकता है, लेकिन कल कभी आने वाला नहीं है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मन्दिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पुण्य व धर्म के प्रभाव से धन-संपदा की वृद्धि होती है, लेकिन धन आने पर मानव धर्म के प्रति आसक्ति भूल बैठता है व उसमें अहंकार आ जाता है। धर्म सरल है, लेकिन धर्मात्मा बनना कठिन है। इंसान जिंदगी भर धन संचय करता है, लेकिन अंत में कफन भी साथ नहीं ले जा पाता। अतः जीवन में ऐसे सद्कार्य करने चाहिए जिससे हम मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकें।

भक्तामर स्तोत्र व समवशरण की महिमा: मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि धर्मसभा के दौरान संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने मानतुंगाचार्य विरचित भक्तामर स्तोत्र की महिमा व प्रभु के गुणानुवाद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों का भामंडल (समवशरण) करोड़ों सूर्यों से भी ज्यादा प्रकाशमान होता है, लेकिन उसमें ताप नहीं होता। उसे देखने मात्र से भव्य जीवों के संताप दूर हो जाते हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसमें भूत, भविष्य व वर्तमान के सातों भव दिखाई देते हैं। हमें ऐसे नेक कार्य करने चाहिए कि हम ऐसे वैभव को प्राप्त कर सकें।

केकड़ी: नेमीनाथ मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मौजूद श्रद्धालु।

मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया मोदक: कार्यक्रम के दौरान भगवान धर्मनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर मुनि ससंघ के सानिध्य में श्रद्धापूर्वक मोदक अर्पित किया गया। मोदक अर्पित करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, सुनील कुमार जैन ज्वैलर्स परिवार को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व प्रातः काल में मुनि संघ एवं आर्यिका जयश्री माताजी व आर्यिका शुद्धश्री माताजी के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। शांतिधारा का सौभाग्य संपत लाल धर्मचंद जैन परिवार ने प्राप्त किया। सायं काल में आरती, भक्ति, शास्त्रसभा व स्वाध्याय सहित आनंद यात्रा का आयोजन किया गया।

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