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दसलक्षण पर्व का आठवां दिन: नेमीनाथ जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म पर हुए प्रवचन, जिनाभिषेक, शांतिधारा व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम

केकड़ी, 23 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि केवल भोजन आदि का त्याग कर देना ही सच्चा त्याग नहीं है, बल्कि क्रोध, मान, मायाचारी, लोभ, कषाय, ईर्ष्या भाव व पर-निंदा का परित्याग करना ही वास्तविक उत्तम त्याग धर्म है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में दसलक्षण पर्व के आठवें दिवस उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि आत्म-धर्म की उपेक्षा ही समस्त दुख व दारिद्र्य का मूल कारण है। अप्राप्त भोगों की इच्छा न करना तथा प्राप्त भोगों से विमुख होना ही सच्चा त्याग है। दान में परोपकार की भावना मुख्य होती है, जबकि त्याग में आत्म-हित का भाव समाहित रहता है। दान अच्छी वस्तु का दिया जाता है, जबकि त्याग थोड़ी वस्तु का भी किया जा सकता है। आत्म-कल्याण के इच्छुक प्रत्येक मानव को अपने जीवन में त्याग धर्म को अवश्य अपनाना चाहिए, क्योंकि इसका आचरण केवल मनुष्य भव में ही संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कर्म रूपी शत्रुओं को पराजित कर अपनी अनमोल आत्मा की रक्षा करें और अज्ञानता को त्यागकर आत्म-शक्ति प्राप्त करें।

केकड़ी: आर्यिका माताजी की अगवानी करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान हुआ पांडाल: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि प्रातः काल जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित सभी दैनिक धार्मिक कार्यक्रम आर्यिका संघ के पावन सानिध्य में संपन्न हुए। इस दौरान सौधर्म इंद्र परिवार द्वारा आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया गया। बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी, पंडित निकेत शास्त्री व आर्यिका संघ के सानिध्य में दसलक्षण विधान के तहत सकल दिगंबर जैन समाज के धर्मावलंबियों द्वारा उत्तम त्याग धर्म के श्रीफल व अर्घ्य समर्पित किए गए। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू भगत सावर परिवार को मिला। वहीं शांतिधारा करने का पुण्यार्जन पारस मल, महावीर प्रसाद, भागचंद, त्रिलोकचंद, लाभचंद, नवल कुमार बघेरा परिवार तथा कैलाशचंद, प्रकाशचंद, पीयूष कुमार बघेरा परिवार ने प्राप्त किया।

महाआरती व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम: दिलीप जैन के अनुसार, संध्या काल में सुमधुर संगीत के साथ महाआरती व धार्मिक आनंद यात्रा का आयोजन हुआ। इसके पश्चात आर्यिका माताजी द्वारा सामायिक प्रतिक्रमण संपन्न कराया गया। रात्रि में श्री नेमिनाथ बालिका मंडल द्वारा दशलक्षण धर्म की महिमा विषय पर आकर्षक एवं भावपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने काफी सराहा।

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