केकड़ी, 11 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मानव को जिंदगी में अच्छे के चक्कर में सच्चे को नहीं छोड़ना चाहिए और इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनेन्द्र देव की पूजा-आराधना में द्रव्य की शुद्धता से ही भावों की शुद्धता संभव है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि तन हो या मन, दोनों का वजन बढ़ना हानिकारक होता है। इंसान को निज स्वार्थ से ऊपर उठकर परमार्थ की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। महान पुण्योदय से मनुष्य जीवन व धन-संपदा मिलती है, इसलिए इसका उपयोग धर्म, दान व परमार्थ के कार्यों में कर पाप कर्मों का क्षय करना चाहिए। प्रत्येक आत्मा शक्ति रूप में परमात्मा है, अतः सभी को समान समझना चाहिए। जो व्यवहार स्वयं को प्रतिकूल लगे, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।

धन संग्रह से बचने के लिए किया प्रेरित: धर्मोपदेश में माताजी ने आवश्यकता से अधिक धन संग्रह से बचने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान खोजना ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है और निज का निज में खो जाना परमात्मा बनने का सुंदर मार्ग है। प्रातःकाल आर्यिका संघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा, जिनेन्द्र अर्चना व दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। इसके पश्चात श्रीजी को गाजे-बाजे के साथ पालकी में विराजमान कर धर्मसभा के पांडाल में लाया गया। बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी व निकेत शास्त्री के निर्देशन में संगीतमय भक्तामर विधान का आयोजन हुआ, जिसमें भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू भगत (सावर वाले) परिवार ने सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

पुण्यार्जक परिवारों ने प्राप्त किया धर्म लाभ: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि शांतिधारा करने का सौभाग्य मेहरूकलां निवासी रमेश चन्द, शकुन्तला, अनिल कुमार, प्रीति, स्नेहलता व स्वाति बंसल परिवार ने प्राप्त किया। वहीं आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन उणियारा निवासी रमेश चन्द, विनोद कुमार, संजय कुमार परिवार एवं रामथला निवासी नोरतमल, बिरदीचंद परिवार ने अर्जित किया। मध्यान्ह में आर्यिका माताजी द्वारा गोम्मटसार जीवकांड ग्रन्थ का स्वाध्याय एवं जिज्ञासा समाधान कराया गया। संध्या समय आरती, भक्ति संगीत, आनंद यात्रा, प्रश्नोत्तरी, भक्तामर आराधना व दीप अर्चना के साथ महाआरती का आयोजन हुआ, जिसकी पूर्णाहुति सौधर्म इन्द्र परिवार व अन्य पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भक्ति भाव से की गई।


