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श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा नारायण-नारायण का जयघोष, वृत्रासुर व अजामिल प्रसंगों ने किया भावविभोर

केकड़ी, 15 मई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): पुरानी केकड़ी स्थित प्राचीन श्री चारभुजा नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में भक्तिभाव, आध्यात्मिक चेतना व संगीत रस की अद्भुत त्रिवेणी देखने को मिली। व्यास पीठ पर विराजमान पंडित कवि बुद्धिप्रकाश दाधीच ने वृत्रासुर, हिरण्यकश्यप एवं अजामिल-नारायण प्रसंगों का ऐसा मधुर एवं भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। कथा के दौरान भगवान विष्णु की महिमा, महर्षि दधीचि के त्याग, भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा व नामस्मरण की महिमा का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य उद्घाटित किया गया। उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप का प्रसंग केवल अहंकार के विनाश की कथा नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब मनुष्य स्वयं को ईश्वर से बड़ा मानने लगता है, तब उसका पतन निश्चित हो जाता है। वहीं भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति यह सिद्ध करती है कि सच्चा श्रद्धाभाव हर परिस्थिति में भगवान की कृपा दिलाता है।

वृत्रासुर प्रसंग का मार्मिक वर्णन: व्यास पीठ से पंडित दाधीच ने अजामिल प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान के नाम का स्मरण मनुष्य के जीवन को पवित्र बना देता है। उन्होंने वृत्रासुर प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब देवराज इंद्र महर्षि दधीचि की अस्थियों से निर्मित दिव्य वज्र लेकर युद्धभूमि में पहुंचे, तब वृत्रासुर ने उस वज्र में स्वयं भगवान विष्णु की शक्ति का दर्शन किया। वृत्रासुर ने उस वज्र को विनाश का अस्त्र नहीं, बल्कि ऋषि दधीचि के त्याग व तपस्या के प्रतीक रूप में प्रणाम किया। उन्होंने बताया कि सच्चा भक्त बाहरी रूप से कैसा भी दिखाई दे, उसका अंत:करण सदैव भगवान में ही स्थित रहता है।

केकड़ी: श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुगण।

भक्तिमय हुआ वातावरण: कथा के साथ प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावमग्न होकर नृत्य करते नजर आए। संपूर्ण मंदिर परिसर भगवान श्री चारभुजानाथ के जयकारों व नारायण-नारायणके उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। कथा के उपरांत महाआरती का आयोजन किया गया तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर पुण्यार्जक हीराचंद खूंटेटा दंपति ने व्यास पीठ की पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में उद्योगपति सुभाष कटारिया, संजय कटारिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर व्यास पीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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