केकड़ी, 08 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य विनश्चय महाराज के सुशिष्य श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में मुक्ति की लालसा तो रखता है, लेकिन वह मुक्ति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ता। मुक्ति प्राप्त करने के लिए कष्ट तो सहना ही पड़ेगा, तभी आत्मानुभूति को पाकर संयम के पथ पर चलने का भाव जागृत हो पाएगा। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मन्दिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में सचमुच मुक्ति की चाह है, तो प्रतिदिन जिन पूजा व भक्ति करते हुए अपने कर्मों की निर्जरा करें। कर्मों की निर्जरा से ही मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है।

भक्तामर की आराधना से मिलती कर्मों से मुक्ति: धर्मसभा में संघस्थ श्रमण मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भक्तामर स्तोत्र” एक ऐसा अद्भुत स्तोत्र है, जिसकी नियमित आराधना करने से प्राणी को भव-भव के कर्मों से मुक्ति मिल जाती है। मुनिश्री द्वारा प्रतिदिन भक्तामर स्तोत्र का हिन्दी में गुणानुवाद करते हुए श्रावकों को इसकी महिमा का बोध कराया जा रहा है। इससे पूर्व मुनि ससंघ के पावन सानिध्य में प्रातः काल श्रीजी का जिनाभिषेक, जिनेन्द्र अर्चना व शांतिधारा के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

नियमित हो रहे है मुनि संघ के प्रवचन: मन्दिर समाज के अध्यक्ष ज्ञान चन्द जैन व मंत्री कैलाश जैन ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से श्री नेमिनाथ मंदिर में मुनि ससंघ के प्रवचन हो रहे है। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि दोपहर 3:00 बजे स्वाध्याय की कक्षा व सायंकाल के समय शास्त्र सभा व आनंद यात्रा का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है। जिसमे बड़ी संख्या में समाज के महिला पुरूष भाग ले रहे है।

