केकड़ी, 16 अप्रैल (आदित्य न्यूज नेटवर्क): विश्वविख्यात हास्य कवि व संवेदनशील गीतकार स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में शुक्रवार को भव्य आध्यात्मिक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। ‘श्री सुरेन्द्र दुबे स्मृति संस्थान‘ द्वारा आयोजित यह 8वां सम्मान समारोह तीर्थराज पुष्कर स्थित गायत्री मणिवेदिक शक्तिपीठ पर स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में चल रहे 43 दिवसीय गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के अंतर्गत रात्रि 8 बजे से होगा। संस्थान के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश दुबे ने बताया कि इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘श्री सुरेन्द्र दुबे स्मृति गीत रत्न सम्मान‘ शाहपुरा के अंतरराष्ट्रीय कवि व साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला को प्रदान किया जाएगा। इस सम्मान के तहत उन्हें एक लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपए की नकद राशि व प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाएगा। यह पुरस्कार किसी कवि की स्मृति में व्यक्तिगत संस्थान द्वारा दिए जाने वाले देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है।

देश के ख्यातनाम कवि करेंगे काव्य पाठ: संस्थान के सचिव डॉ. अविनाश दुबे के अनुसार इस काव्य संध्या में देश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। आमंत्रित कवियों में प्रतिष्ठित कवयित्री डॉ. कीर्ति काले (नई दिल्ली), हास्य कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल (नई दिल्ली), व्यंग्यकार शिव तूफान (ब्यावर), ओजस्वी कवि प्रख्यात मिश्रा (लखनऊ) एवं हास्य कवि दिनेश बंटी (भीलवाड़ा) शामिल है।

महायज्ञ के बीच आध्यात्मिक संगम: महायज्ञ के प्रणेता स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि कलयुग में पहली बार हो रहे इस ऐतिहासिक महायज्ञ में देश भर के 2000 विद्वान पंडित 27 करोड़ गायत्री मंत्रों का जाप कर रहे हैं। इस पवित्र वातावरण में कवि सम्मेलन का आयोजन कविता की मंच पर पुनर्स्थापना को एक नई दिशा देगा। यज्ञ के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित देश के कई दिग्गज नेताओं, धर्मगुरु व हजारों श्रद्धालु यज्ञशाला की प्रदक्षिणा कर चुके है।

विरासत को सहेजने का प्रयास: गुलगांव (अजमेर) जैसे छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले स्व. सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में अब तक पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा नई दिल्ली, संतोष आनंद नई दिल्ली, अशोक चक्रधर नई दिल्ली, डॉ. कीर्ति काले नई दिल्ली, सत्यनारायण सत्तन इन्दौर, डॉ. हरिओम पंवार मेरठ व डॉ. विष्णु सक्सेना अलीगढ़ को सम्मानित किया जा चुका है। संस्थान का लक्ष्य उनकी साहित्यिक विरासत को जीवित रखना व साहित्यकारों को उचित मंच प्रदान करना है।
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