केकड़ी, 28 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि आवश्यकता के समय मार्गदर्शन देने वाले साधु-संत मिल जाएं तो जीवन को सन्मार्ग पर लाने में समय नहीं लगता। चातुर्मास के इस पावन अवसर पर साधु-संतों का सानिध्य मिला है, इसलिए अपने वर्तमान व भविष्य को कल्याणकारी बनाने में विलंब नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शुभ समय बार-बार नहीं आता। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर के संत भवन में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि मन की शांति व मोक्ष सुख की प्राप्ति के लिए साधु-संतों की संगति परम आवश्यक है। देव, शास्त्र व गुरु की निस्वार्थ भाव से की गई भक्ति जनम-जनम के पापों का क्षय करती है। उन्होंने कार्य सिद्धि के संदर्भ में बताया कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए ‘पांच समवाय‘—भाग्य, निमित्त, उपादान, काललब्धि व पुरुषार्थ का होना अनिवार्य है। धर्मसभा की शुरुआत में आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन व माताजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बघेरा वाले कैलाश चंद-प्रकाश चंद जैन (मावा वाले) परिवार को प्राप्त हुआ।

धार्मिक अनुष्ठान व गुरु पूजन: इससे पूर्व सुबह के सत्र में आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। कार्यक्रम में धर्मसभा का संचालन कनक दीदी एवं पंडित निकेत शास्त्री ने किया। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि मध्याह्न सत्र में गुरु भक्ति, स्वाध्याय व प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। वहीं संध्या काल में महाआरती, भक्ति संगीत, शास्त्र सभा, प्रश्न मंच व जिज्ञासा समाधान के साथ आनंद यात्रा संपन्न हुई। जैन समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन (ज्वैलर्स) व मंत्री कैलाश जैन ने जानकारी दी कि आगामी 29 अगस्त (बुधवार) को सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से श्री नेमिनाथ संत भवन में आर्यिका ससंघ के पावन सानिध्य में ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव‘ अत्यंत हर्षोल्लास व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाएगा।


