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आध्यात्म व साहित्य की दिव्य त्रिवेणी: महायज्ञ के प्रणेता स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में हुआ भव्य सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन का आयोजन; साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला को ‘सुरेन्द्र दुबे स्मृति सम्मान’ से किया विभूषित

केकड़ी, 18 अप्रैल (आदित्य न्यूज नेटवर्क): विश्वविख्यात हास्यकवि व संवेदनशील गीतकार स्व. सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में आयोजित 8वें सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। गायत्री मणिवेदिक शक्तिपीठ पर स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में आयोजित 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के अंतर्गत हुए इस गरिमामय कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि कविता का धर्म व आध्यात्म पर गहरा प्रभाव पड़ता है। देशभर से एकत्रित विद्वान शास्त्र अध्येताओं व हजारों श्रोताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

केकड़ी: कवि कैलाश मण्डेला को सुरेन्द्र दुबे स्मृति गीत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करते प्रखर महाराज एवं अन्य अतिथिगण।

डॉ. मण्डेला को सम्मान: अजमेर जिले की ख्याति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाले कवि सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में श्री सुरेन्द्र दुबे स्मृति संस्थानद्वारा इस वर्ष का सुरेन्द्र दुबे स्मृति सम्मान-2026अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त जनकवि, गीतकार व केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला (शाहपुरा) को प्रदान किया गया। महायज्ञ के प्रणेता गुरुवर प्रखरजी महाराज, संस्थान के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश दुबे व प्रतिष्ठित संतों द्वारा डॉ. मण्डेला को 1,11,111 रुपए की राशि का चेक, ताम्र पत्र व अलंकरण भेंट किए गए। कार्यक्रम के प्रारंभ में मण्डेला के विलक्षण प्रस्तुति कौशल व साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया गया।

केकड़ी: विधायक शत्रुघ्न गौतम का अभिनन्दन करते दुबे परिवार के सदस्य।

अतिथियों का भव्य स्वागत: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रखर महाराज का 21 किलो की माला व एक क्विंटल गुलाब की पंखुड़ियों से भव्य अभिनंदन किया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश दुबे ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए इस जन-आयोजन में सहभागिता हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी आनन्द ब्रह्मचारी जी महाराज ने सफल काव्य प्रस्तुति दी। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सज्जन प्रसाद तिवाड़ी (गुरुजी), प्रसिद्ध भजन गायक नन्दू महाराज, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम, पुष्कर के विख्यात पण्डित पुखराज दुबे व अशोक पारीक सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे।

काव्य निशा में हास्य व्यंग्य की फुहार: विश्व प्रसिद्ध मंच संचालिका डॉ. कीर्ति काले के संचालन व सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन का आगाज हुआ। सम्मानित कवि डॉ. कैलाश मण्डेला ने स्व. सुरेन्द्र दुबे के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी पंक्तियों— “जीतोगे तुम सदा विचारों, लड़ने से पहले मत हारो” के माध्यम से अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। हास्य कवि दिनेश बंटी ने अपनी प्रसिद्ध रचना पंचायती नोहरासे श्रोताओं को हंसाकर लोटपोट कर दिया। लखनऊ से आए युवा ओजस्वी कवि प्रख्यात मिश्रा ने “राम वही जो सबरी को सम्मान दिलाने वाले हैं” सुनाकर वातावरण को देशभक्ति व भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। ब्यावर के प्रसिद्ध व्यंग्यकार शिव तूफान ने अपनी रचना भगवान का पताके माध्यम से मंच को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।

केकड़ी: श्रोताओं का अभिवादन करते कविगण।

ओज व भक्ति की बही सरिता: दिल्ली से आईं अंतरराष्ट्रीय कवयित्री डॉ. डॉ. कीर्ति काले ने “मां-बाप के चरणों में चारों धाम मिलते हैं” व बेटी की विदाईजैसी रचनाओं से सभी को भाव-विभोर कर दिया। नई दिल्ली के प्रख्यात कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल ने कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान कृष्ण के शस्त्र धारण प्रसंग को अपने चिरपरिचित अंदाज में सुनाकर सबको सम्मोहित कर दिया। बिजयनगर के कवि नवीन शर्मा ने भी श्रेष्ठ गीत पाठ किया। सम्मानित कवि डॉ. कैलाश मण्डेला ने जब अपनी गुरु वंदना “असीम जिनकी चेतना, सुकृत्य से विशाल है” व “गुरु जगमग करता तारा रे” सुनायी, तो श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। काव्यपाठ के दौरान उत्साहित श्रोताओं द्वारा डॉ. मण्डेला पर निरंतर नोटों व फूलों की वर्षा की जाती रही।

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