केकड़ी, 14 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): बढ़ते कदम संस्थान व तप सेवा सिमरन समिति के संयुक्त तत्वावधान में कटारिया ग्रीन में आयोजित मानस योग साधना शिविर में रविवार को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक स्पिरिचुअलिज्म मेरठ की आध्यात्मिक प्रमुख श्यामा दीदी ने सेवा व सुमिरन के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक सिद्धांतों पर विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के जीवन में सेवा व सुमिरन है, तो उसका जीवन निश्चित रूप से सुखद, संतुलित व सार्थक बनता है। सुमिरन यानी ध्यान की गहराई को उपलब्ध होना सेवा के सिद्धांत पर टिका है, जिससे दोष समाप्त होते हैं व मनुष्य निर्मल स्थिति में ध्यान में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने दशांश की व्यवस्था को वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि अर्जित धन में से परमार्थ व सेवा कार्यों के लिए अंश समर्पित होना चाहिए। दान व वितरण की परंपराएं मनुष्य के कल्याण के वैज्ञानिक सूत्र हैं। जब व्यक्ति बांटना सीखता है तो सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जबकि संग्रह व स्वार्थ से चिंता, भय व रोग जन्म लेते हैं। इस दौरान राधा दीदी ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि निस्वार्थ सेवा व ईश्वर स्मरण जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं।

संतोष के लिए समाज व परमार्थ में धन का उपयोग जरूरी: शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. गोपाल शास्त्री ने कहा कि सुमिरन व भजन के अभाव में ही जीवन तनाव व चिंताओं से घिरता है। धन का मूल्य तभी है जब उसका उपयोग समाज व परमार्थ के कार्यों में हो। केवल धन एकत्रित करते रहना व उसमें से दशांश न निकालना संतोष नहीं दे सकता। सेवा के लिए धन अधिक होना आवश्यक नहीं, कम आय वाला व्यक्ति भी क्षमतानुसार सेवा कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान पूर्व नर्सिंग अधीक्षक गोपाल लाल वर्मा ने आध्यात्मिक प्रमुख श्यामा दीदी व राधा दीदी का सम्मान करते हुए संस्था संचालन के लिए 51 हजार रुपए की सहयोग राशि भेंट की। इस अवसर पर भगवान स्वरूप नुवाल, सुरेश नुवाल, गोपाल लाल वर्मा व अशोक पारीक सहित अन्य गणमान्यजन मंचासीन रहे। व्यवस्था प्रमुख आनंद सोमानी ने शिविर की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए सेवा व अनुशासन पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन कवि बुद्धि प्रकाश दाधीच ने किया।


