हैदराबाद (तेलंगाना), 15 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि आज का दिन केवल स्वतंत्रता का पर्व नहीं, बल्कि गौरवशाली इतिहास को स्मरण करने, शहीदों के बलिदान को नमन करने व देश के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लेने का दिन है। संसार में भारत ही ऐसा देश है जिसे ‘माता‘ कहा जाता है, क्योंकि मां सबको शरण देती है। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सभा में मंगल प्रवचन कर रहे थे।

तिरंगे के रंगों का संदेश व गौरवशाली संस्कृति: आचार्यश्री ने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग त्याग, सफेद शांति व हरा समृद्धि का प्रतीक है। समृद्धि से पहले शांति व शांति से भी ऊपर त्याग की महिमा है। उन्होंने श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास व श्रवण कुमार की पितृभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि त्याग और समर्पण ही हमारी संस्कृति व गौरवशाली विरासत है। 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता संग्राम में सभी समाजों के वीरों ने योगदान दिया, जिनके प्रति हमें कृतज्ञ रहना चाहिए।

मातृभाषा का सम्मान व स्वच्छता का संकल्प: आचार्य श्री ने मां, मातृभूमि व मातृभाषा के प्रति सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि अंग्रेजी व अन्य भाषाएं जरूर सीखें, लेकिन घर में मातृभाषा का प्रयोग करें ताकि आने वाली पीढ़ियां संस्कारों से जुड़ी रहें। स्वच्छता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि विदेशों की तरह दंड के डर से नहीं, बल्कि भीतर से कर्तव्यभाव जगाकर “न कचरा फैलाएंगे, न फैलाने देंगे” का संकल्प लें। उन्होंने “स्वच्छ भारत, श्रेष्ठ भारत व भ्रष्टाचार-मुक्त भारत” के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

भव्य रैली, ध्वजारोहण व बहुमान समारोह: इस अवसर पर 400 वर्ष प्राचीन श्री गोडी पार्श्वनाथ मंदिर से स्वतंत्रता सेनानियों की वेशभूषा में सजे बच्चों के साथ दादावाड़ी तक भव्य रैली निकाली गई। इसके बाद दादाबाड़ी प्रांगण में मुख्य अतिथि तेलुगु फिल्म अभिनेत्री प्रियंका जैन ने ध्वजारोहण किया। समारोह के दौरान श्री संघ शास्ता वर्षावास समिति–2026, खरतरगच्छ युवा परिषद व महिला परिषद द्वारा क्षेत्र के 104 युवा एवं महिला मंडलों को समाजसेवा के लिए सम्मानित किया गया। वहीं धर्मराज जैन ज्वैलर्स (शालीबंडा) की ओर से कक्षा 6 व उससे ऊपर 80% या अधिक अंक प्राप्त करने वाले जैन छात्र-छात्राओं का बहुमान किया गया।



