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दसलक्षण पर्व का शुभारंभ: भक्तिभाव से गूंजा धर्मसभा पांडाल, माताजी ने समझाया उत्तम क्षमा धर्म का महत्व

केकड़ी, 16 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि क्रोध ऐसा अवगुण है, जिससे मनुष्य खुद उलझता और पिछड़ता है। क्रोध को त्यागकर क्षमा धर्म को स्वीकार करना ही वास्तविक आत्म-कल्याण का मार्ग है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में दसलक्षण पर्व के शुभारंभ अवसर पर उत्तम क्षमा धर्म विषय पर प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि मनुष्य अहंकार और मान के कारण क्षमा मांगने से कतराता है। भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय संयम के मार्ग पर चलने से ही आत्मा का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने क्रोध को जीतकर क्षमा भाव धारण करने पर बल दिया। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल एवं पारस जैन ने बताया कि प्रातः काल श्री नेमिनाथ मंदिर से भगवान श्री जी को गाजे-बाजे के साथ पालकी में विराजमान कर धर्मसभा पांडाल लाया गया।

केकड़ी: जिनेन्द्र प्रतिमा की शांतिधारा करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

धार्मिक अनुष्ठान व विधान: शुरूआत में सौधर्म इंद्र परिवार द्वारा पांडाल शुद्धि, मंगल कलश स्थापना, जिनाभिषेक व शांतिधारा संपन्न की गई। श्रद्धालुओं ने संगीत की मधुर धुनों पर जिनेन्द्र अर्चना की। इसके साथ ही आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य ओम प्रकाश, गोविन्द कुमार, योगेश कुमार, अंकुर व अभिषेक सदारा परिवार को मिला। शांतिधारा का सौभाग्य कांता देवी, अशोक कुमार, ज्ञान चंद, अवनीश, संजय, हिमांशु सिंहल (बघेरा परिवार) तथा भागचंद, ज्ञान चंद व सुनील कुमार (धून्धरी परिवार) ने अर्जित किया।

केकड़ी: नेमिनाथ मंदिर में आयोजित तत्त्वार्थ सूत्र विधान में भाग लेते श्रद्धालु।

तत्त्वार्थ सूत्र विधान: मध्यान्ह में श्री नेमिनाथ मंदिर में तत्त्वार्थ सूत्र विधान का आयोजन हुआ, जिसमें आर्यिका माताजी ने प्रथम अध्याय का हिंदी में वाचन कर श्रद्धालुओं को तत्व ज्ञान समझाया। संध्या समय महाआरती, भक्ति संगीत, आनंद यात्रा और प्रतिक्रमण के आयोजन हुए। इस दौरान राजुल महिला मंडल की ओर से खेल-खेल में खेलो प्रतियोगिता आयोजित की गई। सभी धार्मिक कार्यक्रम बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी एवं निकेत शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुए।

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