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अहंकार जीवन का सबसे बड़ा शत्रु, इसके त्याग से बदलती है जीवन की दिशा: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 10 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि साधु-संतों की संगति हमेशा करनी चाहिए, क्योंकि यह हमारे कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है। गुरु भक्ति व संयम धारण कर गुरु की शरण से ही सम्यकत्व की प्राप्ति होती है। सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र ही मोक्ष का मार्ग है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि अहंकार जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। इसके विलोपित होते ही जीवन की दशा और दिशा बदल जाती है। मनुष्य जीवन में भावों में हमेशा निर्मलता रखनी चाहिए और धर्म व संयम के पथ पर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

भाग्यशाली जीव करते तीर्थ क्षेत्रों की वंदना: धर्मसभा के दौरान माताजी ने कहा कि भाग्यशाली जीव ही तीर्थ क्षेत्रों की वंदना कर पुण्य का अर्जन करते हैं। मानव तन व्यर्थ न जाए, इसके लिए आत्म ध्यान लगाकर आत्म कल्याण की भावना रखनी चाहिए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि धर्मसभा से पूर्व नित्यनियम पूजन, शांतिमंत्र व विधान आदि धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य ओमप्रकाश, अनिल कुमार जूनियां परिवार को प्राप्त हुआ।

केकड़ी: सम्मेद शिखर यात्रा के पोस्टर का विमोचन करती आर्यिका सुरम्यमति माताजी।

सम्मेद शिखर जी यात्रा के पोस्टर का विमोचन: दिलीप जैन ने जानकारी दी कि अहिंसा तीर्थ यात्रा संघ द्वारा 15 अगस्त को श्री सम्मेद शिखर जी के लिए रवाना होने वाले यात्रा संघ के पोस्टर का विमोचन आर्यिका संघ के सानिध्य में किया गया। मध्याह्न में आर्यिका संघ द्वारा गोम्मटसारग्रंथ का स्वाध्याय एवं प्रश्नोत्तर समाधान किया गया। वहीं सायंकाल आरती, भक्ति संगीत के साथ त्रिलोकसारग्रंथ का स्वाध्याय एवं धर्म चर्चा आयोजित हुई। धर्म सभा का संचालन बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी एवं पंडित निकेत शास्त्री ने किया।

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