केकड़ी, 26 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि व्यक्ति धन की तो रक्षा कर लेता है, लेकिन अपने आंतरिक गुणों की सुरक्षा के प्रति सजग नहीं रहता। जीवन में संस्कारों का बड़ा महत्व है; इनके बिना जीवन नारकीय बन जाता है और इंसान विवेकहीन रहता है। संस्कारों से ही मानव में मानवता आती है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि वासना पानी की बूंद जैसी न होकर आग की चिंगारी के समान होती है। पानी की बूंद को प्रवाह बनने में समय लगता है, लेकिन चिंगारी को दावानल (भीषण आग) बनने में देर नहीं लगती। यदि मानव अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण कर ले, तो वह अपनी दृष्टि, दिशा व दशा से जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

शांतिधारा व माला धारण करने का मिला सौभाग्य: श्री जिनेन्द्र देव की शांतिधारा करने का सौभाग्य बघेरा निवासी सुशीला देवी, ओमप्रकाश, गोविंदकुमार, राजकुमार, उत्कर्ष, सक्षम, पंथ सिंहल सदारा परिवार तथा पारसमल, महावीरप्रसाद, भागचंद, त्रिलोकचंद, लाभचंद व नवल कुमार गोयल परिवार ने प्राप्त किया। वहीं अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आर्यिका माताजी के सानिध्य में सावर निवासी भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू व मोनू भगत परिवार को श्रीजी की माला लेने का सौभाग्य मिला। धर्मसभा का संचालन बा.ब्र. कनक दीदी एवं पं. नितेश शास्त्री ने किया। मध्याह्न सत्र में आर्यिका माताजी द्वारा शास्त्र स्वाध्याय एवं श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

तपस्वियों का सामूहिक पारणा व भव्य जुलूस: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल एवं पारस जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के समापन पर आर्यिका संघ के सान्निध्य में 10 उपवास करने वाले पुण्यशाली तपस्वियों का धर्म सभा पंडाल में सामूहिक पारणा कराया गया। इसके पश्चात नेमिनाथ मंदिर से बग्गियों, बैंड-बाजों व धार्मिक भजनों के साथ तपस्वियों का भव्य जुलूस निकाला गया। दिलीप जैन के अनुसार संध्या समय आरती, भक्ति, स्वाध्याय प्रश्नोत्तरी एवं आनंद यात्रा संपन्न हुई। तीर्थ वंदना संघ के तत्वावधान में ‘विशाल हाउजी‘ कार्यक्रम का आयोजन हुआ तथा ‘जिनवाणी सजाओ‘ प्रतियोगिता आयोजित की गई।


