हैदराबाद (तेलंगाना), 19 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत छोटा है, इसलिए इसे चिंता, तनाव और क्रोध में गंवाने के बजाय प्रसन्नता व शांति के साथ जीना चाहिए। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धार्मिक सभा में मंगल प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य की तीन मुख्य इच्छाएं होती हैं—अच्छा पाना, अच्छा दिखना और अच्छा बनना। अच्छा पाने की चाह कभी खत्म नहीं होती, इसलिए शांति के लिए संतुष्टि आवश्यक है। दूसरों की नजरों में अच्छा दिखने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण अपनी अंतरात्मा की नजरों में अच्छा बनना है।

शांति को अपनाना ही परम समाधि का सच्चा मार्ग: गुरूदेव ने कहा कि आंखों व कानों पर विवेक का चौकीदार रखें ताकि जीवन में केवल पवित्रता का प्रवेश हो। दिमाग को हमेशा ठंडा रखें, सहनशीलता से ही बड़े-बड़े विवाद टलते हैं। जुबान से हमेशा इष्ट, मिष्ट व शिष्ट शब्द बोलें क्योंकि कड़वे शब्दों के घाव लंबे समय तक रहते हैं। हृदय में प्रेम रखें; जो प्रेम बांटता है, वही प्रेम पाता है तथा व्यवहार, भाषा व विवेक में सच्चाई अपनाएं, यही मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती है। जीवन में इन बातों को अपनाने के बाद घर में महाभारत नहीं बल्कि रामायण का वातावरण बनेगा। आक्रोश त्यागकर शांति को अपनाना ही परम समाधि का सच्चा मार्ग है।

