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मान मीठा जहर, मार्दव धर्म से कठिन कार्य भी हो जाते हैं सरल: आर्यिका सुरम्यमति

केकड़ी, 17 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मान एक मीठा जहर है, जबकि मार्दव धर्म को अपनाने से अति कठिन कार्य भी सरलता से सिद्ध हो जाते हैं। जहां मार्दव धर्म है, वहीं साधुता, सज्जनता व मानवता का वास होता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में दशलक्षण पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि इंसान धन-सम्पत्ति व प्रभुता पाकर अहंकार कर लेता है, लेकिन पापोदय आने पर धन-सम्पत्ति जल के बुलबुले के समान क्षण भर में नष्ट हो जाती है। धन का सदुपयोग दान-पुण्य व धार्मिक कार्यों में करना ही बुद्धिमत्ता है। अहंकार इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है, जिसमें भारीपन होता है। जिस प्रकार लोहे के नरम होने पर औजार, आटे के नरम होने पर रोटी, मिट्टी के नरम होने पर उपजाऊ भूमि व स्वर्ण के नरम होने पर आभूषण बनते हैं, उसी प्रकार इंसान नम्र होकर उत्तम मार्दव धर्म को अपना ले तो सभी के दिलों में जगह बना लेता है।

केकड़ी: नेमिनाथ मंदिर में प्रवचन करती आर्यिका सुरम्यमति माताजी।

इंद्र बनने व शांतिधारा का मिला सौभाग्य: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत में आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र परिवार को मिला। बा.ब्र. कनक दीदी व पं. निकेत शास्त्री के निर्देशन में संगीतमय दशलक्षण धर्म विधान का आयोजन किया गया। सौधर्म इंद्र बनने का पुण्य महावीर प्रसाद, माणकचन्द, राजेंद्र कुमार, चन्द्रप्रकाश मित्तल रामथला परिवार, पदम चंद, निहाल चंद, नौरतमल, गणेश, अतिशय जूनियां परिवार व विमल कुमार, राजेंद्र कुमार, रमेश चंद बंसल मेहरू कलां परिवार को प्राप्त हुआ। श्री जी की शांतिधारा का पुण्यार्जन पदम चंद, निहाल चंद, नौरतमल, गणेश, अतिशय जूनियां परिवार व विमल कुमार, चेतन कुमार बिसून्दनी परिवार ने किया।

केकड़ी: नेमीनाथ मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करती महिलाएं।

धार्मिक क्रियाएं व तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय: प्रातःकाल आर्यिका संघ के सानिध्य में नित्याभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्याह्न में आर्यिका माताजी द्वारा उमास्वामी विरचित तत्त्वार्थ सूत्र के द्वितीय अध्याय का वाचन व सविस्तार स्वाध्याय किया गया। दिलीप जैन के अनुसार रात्रि में राजुल महिला मंडल द्वारा एक मिनट जोड़ी मिलावो प्रतियोगिता आयोजित की गई। वहीं संध्या समय आरती, भक्ति संगीत व धार्मिक आनंद यात्रा के साथ श्री दिगंबर जैन महिला महासमिति द्वारा जैन हाउजी का भव्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। अंत में सौधर्म इंद्र परिवारों व पुण्यार्जकों द्वारा महाआरती संपन्न की गई।

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