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सत्य जीवन का प्रकाश, आचरण से ही मिलता है सच्चा आदर: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 20 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि व्यवहार में झूठ का त्याग कर हित, मित व प्रिय वचन बोलना ही सत्य है। सत्य जीवन का प्रकाश है और ऐसा आभूषण है जिसे धारण कर मनुष्य शोभा पाता है। सत्य वचन विश्वास का मंदिर व विपत्ति का नाशक है, जबकि असत्य दुख और अशांति की जड़ है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में दसलक्षण पर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि किसी को आदर ज्ञान, यश या कुल से नहीं, बल्कि केवल उसके उत्तम आचरण से मिलता है। यदि धनार्जन में अधर्म साधन बनता है, तो वह निश्चित रूप से विनाश का कारण बनता है।

जिनेन्द्र प्रतिमाओं की शांतिधारा: प्रातःकाल आर्यिका संघ के सान्निध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्यान्ह में आर्यिका माताजी द्वारा तत्वार्थ सूत्र का स्वाध्याय एवं श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि कार्यक्रम में आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सौधर्म इन्द्र परिवार को प्राप्त हुआ। बा.ब्र. कनक दीदी व पं. निकेत शास्त्री के निर्देशन में मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने दशलक्षण विधान एवं उत्तम सत्य धर्म की पूजा-आराधना की।

केकड़ी: विधान मंडल पर श्रीफल अर्घ्य समर्पित करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

ये बने लाभार्थी: इस अवसर पर सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य शांतिलाल, पारसकुमार, विनोदकुमार, राकेशकुमार व मंगल जूनियां परिवार ने प्राप्त किया। वहीं श्रीजी की शांतिधारा करने का पुण्यार्जन श्रीमती चमेलीदेवी, विनोदकुमार, गणेशकुमार बंसल मेहरूकलां परिवार एवं पारसमल, महावीरप्रसाद, भागचन्द, तिलोकचन्द, लाभचन्द व नवलकुमार बघेरा परिवार को मिला। दिलीप जैन के अनुसार सायंकाल आरती, भक्ति संगीत, प्रश्नोत्तरी एवं धार्मिक आनंद यात्रा संगीतमय माहौल में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। इस दौरान शांतिनाथ बहु मंडल की ओर से भक्तामर की महिमा पर आधारित मनमोहक नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी गई।

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