केकड़ी, 15 अप्रैल (आदित्य न्यूज नेटवर्क): न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने चेक अनादरण के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी को कारावास व आर्थिक दंड से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी पंकज आचार्य को 6 माह के साधारण कारावास व 2,15,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। प्रकरण के तथ्यों के अनुसार परिवादी फर्म विमल कुमार सुनील कुमार बोरदिया के प्रोपराइटर अशोक कुमार बोरदिया ने न्यायालय में परिवाद पेश कर बताया कि जी.ए. एंटरप्राइजेज सरवाड़ के प्रोपराइटर पंकज आचार्य 2 जनवरी 2020 को परिवादी की दुकान से पुट्टी के कट्टे खरीदे तथा इसके भुगतान के एवज में 1,80,000 रुपए का भारतीय स्टेट बैंक का चेक दे दिया।

खाते में नहीं थी पर्याप्त राशि: जब परिवादी ने उक्त चेक बैंक में लगाया, तो खाते में अपर्याप्त राशि होने के कारण चेक अनादरित होकर लौट गया। इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को विधिक नोटिस भेजकर राशि लौटाने की मांग की, लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया। अंततः परिवादी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

न्यायालय का फैसला: सुनवाई के दौरान परिवादी के अधिवक्ता निर्मल चौधरी ने तर्क दिया कि आरोपी ने जानते हुए भी कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं है, चेक जारी किया। यह कृत्य नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आता है व परिवादी के साथ धोखाधड़ी है। माननीय न्यायालय ने अधिवक्ता के तर्कों व उपलब्ध साक्ष्यों से सहमत होते हुए आरोपी पंकज आचार्य को 6 माह के कारावास व 2,15,000 रुपए के जुर्माने से दंडित करने का आदेश जारी किया है।


