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कषायों का त्याग कर धर्म के मार्ग पर चलें श्रद्धालु: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 15 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि सांप के दांत व बिच्छू के डंक में मौजूद जहर से बचाव संभव है, परंतु मनुष्य के भीतर जमा जहर बेहद घातक होता है। इंसान की अपेक्षाएं पूरी न होने पर वह क्रोधवश गलत कदम उठा लेता है, जबकि अहंकार विनाश का कारण बनता है। जीवन में आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां पूर्व कर्मों का ही परिणाम होती हैं। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने आगामी 16 सितंबर से शुरू हो रहे दशलक्षण (पर्युषण) पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से धर्म के प्रति अटूट आस्था बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व आत्म-शुद्धि, आत्म-अवलोकन, त्याग व संयम के माध्यम से आत्मा को श्रृंगारित करने का महान अवसर है। इस दौरान पांच पापों, काम-वासना व कषायों से दूर रहकर आत्म-चिंतन पर बल देना चाहिए।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई शुरुआत: धर्म सभा के दौरान आर्यिका संघ के सानिध्य में प्रातःकाल जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना की गई। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य धर्मचंद व रोहित कुमार बाजटा परिवार को मिला। धर्मसभा का संचालन बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी व पंडित निकेत शास्त्री ने किया। संध्या काल में आरती, भक्ति संगीत व प्रश्नोत्तरी का आयोजन हुआ। दिलीप जैन के अनुसार दशलक्षण पर्व के दौरान प्रतिदिन सामूहिक पूजन, अभिषेक व शांतिधारा के अनुष्ठान होंगे। पर्व के प्रथम दिन बुधवार को सौधर्म इंद्र परिवार द्वारा श्री नेमीनाथ मंदिर से श्रीजी को पालकी में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ पांडाल स्थल तक लाया जाएगा।

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