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दिखावे व ख्याति के लिए किया गया दान होता है निरर्थक, धर्म कल्याण की भावना से ही होता है आत्म कल्याण: मुनि प्रज्ञान सागर

केकड़ी, 15 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य विनश्चय महाराज के सुशिष्य श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि धर्म कार्य में दिया गया दान महान हितकारी होता है। आज मानव दान तो करता है, लेकिन उसमें दिखावा ज्यादा होता है। लोग ख्याति व खुद के नाम के लिए मानपूर्वक दान करते हैं, लेकिन इस सोच से किया गया दान कभी भी आत्म कल्याणी नहीं होता। मानपूर्वक किया गया दान निरर्थक हो जाता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मन्दिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि द्रव्य दान के लिए धन की आवश्यकता होती है, परंतु साधु-संतों की सेवा व आहार दान कोई भी व्यक्ति देकर पुण्य की प्राप्ति कर सकता है। हमें हमेशा धर्म कल्याण की भावना को ध्यान में रखकर ही दान करना चाहिए।

भगवान पर छत्र चढ़ाने वाले को कभी नहीं मिलती पीड़ा: संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के गुणानुवाद के माध्यम से प्रेरणा देते हुए कहा कि जो व्यक्ति भगवान के ऊपर छत्र चढ़ाता है, उसे जीवन में कभी भी पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ता। वह तीन लोक के नाथ की छत्रछाया में आत्म कल्याण करने का सहभागी बन जाता है व भगवान उसके ऊपर हमेशा अपनी छत्रछाया बनाए रखते हैं। स्तुति, वंदना, पूजा-अर्चना व दान करने से मनुष्य सौभाग्यशाली बनता है।

धार्मिक अनुष्ठानों से महका माहौल: मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि प्रातः काल मुनिसंघ के पावन सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित सभी धार्मिक क्रियाएं आनंदपूर्वक संपन्न हुईं। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य महावीर प्रसाद, चेतन कुमार कालेड़ा परिवार को मिला। वहीं शांतिधारा करने का परम पुण्यार्जन कैलाशचंद, दीपक कुमार चोरुका परिवार ने प्राप्त किया। दोपहर के सत्र में श्रावकों को स्वाध्याय के माध्यम से धर्म उपदेश देकर संयम मार्ग अपनाने का संदेश दिया गया। वहीं शाम को सामूहिक आरती, भक्ति, शास्त्र सभा, स्वाध्याय व आनंद यात्रा के साथ पूरा माहौल धार्मिक रंग में सराबोर रहा।

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